आज़ के अखबारों में बड़े-बड़े शहरों में ग़ालिब अखबारों में क्या छपता ! देश का बनिया लूट चवन्नी परदेशों में जा छिपता [१ ] सरकारें अफ़रा-तफ़री में बैंक बड़े बेहाल पड़े देश-देशान्तर तू-तू मैं-मैं जनता ले अख़बार पढ़े [२ ] डुब गई लुटिया, वातिल-गमन की नेता जी के क्या छटका? मरती तो बदहाल किसानी भारत का सोना मरता [३] आज़ के अख़बारों में ग़ालिब न्याय छोड़ सब कुछ छपता [४] 'स्वव्यस्त'
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किस राग से, दिल रो रहा ? दुःख किसी का रो रहा कोई दर्द खुद को हो रहा किससे कहें ? कैसे कहें ? किस राग से, दिल, रो रहा ? कितने दीवाने, जागते सारा जहाँ, जब सो रहा है, क्या वजह इन आंसुओं की ? सब्र क्यों कोई, खो रहा ? ।1। किसकी आँखें, रो रहीं ? कब किसका, आंसू सूखता ? जागता, किसका खुदा ? भगवान किसका, सो रहा ? ।2। किससे कहें ? कैसे कहें ? किस राग से, दिल, रो रहा ? -0_0- हिमांशु राय ' स्वव्यस्त' -0_0-
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