बैरी हवा बैरी हवा जब छू के जाती जख्म जो तूने लगाये तुझसे मिलने को पवन-मन आज भी ये चहचाहये ।1। जब भी दिल को, याद तेरी फूल सी, सूरत वो आती चुभते हैं, काँटे चमन के हर कलि भी, खिलखिलाती बदलों में, घिर के सावन, छनछना कर, बरस जाये आज भी तुझे देखने को जाने क्यूँ मन तरस जाये ।2 । तुझसे मिलने को पवन-मन आज भी ये चहचाहये -0_0- हिमांशु राय ' स्वव्यस्त' -0_0-
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बादल यादें भर-भर लाया बादल यादें भर-भर लाया तन्हाई का मौसम छाया छम-छम करता कहर बरसता दिल की आह! से मन भर आया बादल यादें भर-भर लाया नींद रात की उड़-उड़ जाती अश्क़ों ने लब-पलक भिंगाया चैन दिवस भर नहीं एक पल आशाओं से मन अकुलाया बादल यादें भर-भर लाया तम के तीन प्रहर जा निकले स्वप्न में शोक ने विघ्न लगाया जोर-जोर अति सिसक रहा कोई कहता प्यार किया क्या पाया ? बादल यादें भर-भर लाया | | -0_0- हिमांशु राय ' स्वव्यस्त' -0_0-
आज़ के अखबारों में बड़े-बड़े शहरों में ग़ालिब अखबारों में क्या छपता ! देश का बनिया लूट चवन्नी परदेशों में जा छिपता [१ ] सरकारें अफ़रा-तफ़री में बैंक बड़े बेहाल पड़े देश-देशान्तर तू-तू मैं-मैं जनता ले अख़बार पढ़े [२ ] डुब गई लुटिया, वातिल-गमन की नेता जी के क्या छटका? मरती तो बदहाल किसानी भारत का सोना मरता [३] आज़ के अख़बारों में ग़ालिब न्याय छोड़ सब कुछ छपता [४] 'स्वव्यस्त'
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