किस राग से, दिल रो रहा ? दुःख किसी का रो रहा कोई दर्द खुद को हो रहा किससे कहें ? कैसे कहें ? किस राग से, दिल, रो रहा ? कितने दीवाने, जागते सारा जहाँ, जब सो रहा है, क्या वजह इन आंसुओं की ? सब्र क्यों कोई, खो रहा ? ।1। किसकी आँखें, रो रहीं ? कब किसका, आंसू सूखता ? जागता, किसका खुदा ? भगवान किसका, सो रहा ? ।2। किससे कहें ? कैसे कहें ? किस राग से, दिल, रो रहा ? -0_0- हिमांशु राय ' स्वव्यस्त' -0_0-
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गम के सायों में प्यार की बारिस में, भींग लिए पल-भर अब आंसुओं से लतफत हो जाने का मन है यादों से भर आया दिल, आज इतना नैनों से नदियाँ बहाने का मन है ।1। जो, कह सका ना कभी हाल तुझसे मेरी चाहतों की बातें तेरे जुल्मों के किस्से मेरी यादों की बगिया वो बिखरे इरादे इक वादा मेरा वो बहाने तेरे ।2। सब रहेंगे सलामत लिखे कागजों में मेरी नादान बातें तेरे नख़रे बड़े ।3। प्यार तो तेरा मुझको न हासिल हुआ गम के सायों में घुप्प चीख जाने का मन है ।4। फिरआंसुओं से लतफत हो जाने का मन है -0_0- हिमांशु राय ' स्वव्यस्त' -0_0-
आओ सब मिल एक हों हम
बातें ऊँची, ऊँचे मक़सद नीच हरकत हो गयी हमने देखा काफ़िलों को मौत लेकर सो गयी सब मरे कातिल, पुजारी आशिकी के फुलझड़ी मौत खाकर ख़ाक़ हँसती है क्या तेरी हेकड़ी ? कह रहे जितने गए सब बच सके न बन पड़ी पाक हो नापाक सब-पर मौत ये दर-दर खड़ी गर एक क्षण ही जिंदगी है क्यों न खुशियां बाँट दें ? आओ सब मिल एक हों हम खाईयोँ को पाट दें -0_0- ' स्वव्यस्त' -0_0-
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