याद में तिल-तिल तड़पना याद में तिल-तिल तड़पना रात का जगना झलक भर को एक-बस वीरान में नज़रें भटकना जाने क्या दीवानगी है अजब दिल का टूट, हँसना याद में तिल-तिल तड़पना अश्क पलकों से फिसलना मुस्कुराकर बात करना सुन सके न कोई, उस आवाज़ से पल-पल बिलखना याद में तिल-तिल तड़पना बेरुखी अंदाज़ में कुछ बेसुधी सी होश में वो, महफ़िलों में, तेरी गोरी बाहों का न होना खलना याद में तिल-तिल तड़पना नींद में भी, होश में भी रात आते स्वप्न में भी स्मरण करना तुम्हारी तुमसे सब बेबाक कहना चाहतों की बातें करना स्वप्नों का सजना, विखरना मंज़िलें जिनके लिए सब राज सब संसार तजना अब हैं लगतीं बेवजह ये बेतुका मन का बहकना याद में तिल-तिल तड़पना 'स्वव्यस्त'
परदेशों में जा छिपता [१ ]
भारत का सोना मरता [३]
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थका सी जातीं ये यादें हमें बुलाते, हम आ जाते यादों में क्यों, क्या जीना ? थका सी जातीं, ये यादें घुट-घुट आंसू, ये पीना ।1। रहना था जब, दिल के पास ही दूर निकल गए, जाने कहाँ क्यों दिल में जगह, दी थी रह जाते मुश्किल ना, होता जीना थका सी जातीं, ये यादें घुट-घुट आंसू, ये पीना ।2। ख़ता हुयी, जो भी मुझसे एक बार को तो, कह सकते थे? नाचीज़ के तो, सब कुछ तुम ही थे तन, जीवन, मरना-जीना ।3। बस लौट अभी, आ जाओ अब, मुश्किल लगता तुम बिन जीना थका सी जातीं, ये यादें और घुट-घुट आंसू, ये पीना ।4। -0_0- हिमांशु राय ' स्वव्यस्त' -0_0-
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