सोच मैं उनके सहारे जो किया, था वो गलत? या किया जिससे, गलत था? कर रहा, क्या वो सही है? या के सोचा ही गलत था? ।1। उलझ ऐसी, उधेड़बुन में लड़खड़ा, जाता कभी मैं गिर भी जाता, हूँ कभी फिर, सम्भल जाता आप से ।2। गिरते सम्भलते, लड़खड़ाते चल रहा हूँ, अनवरत न साथ कोई, है न मंजिल ना हि दिखते, अब किनारे ।3। मुड़ सकूँ, एक बार फिर से बदलने, खुद के सितारे छोड़ आया, जिनको पीछे सोच मैं उनके सहारे ।4। -0_0- हिमांशु राय ' स्वव्यस्त' -0_0-
परदेशों में जा छिपता [१ ]
भारत का सोना मरता [३]
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बना रहे तेरा यादमहल ख्वाबों में भी तू बिछड़ेगी , आहट भर से घबरा अक्सर इस सोच मे एक पागल रातों को जगा हुआ ही रह जाये टूटे ना 'यादमहल' तेरा यादों से दूर न तू जाये ।1। जित जागता ये तन रातों को तित कल्प मन में हो रहा प्रबल पाखण्ड मूलतः कभी प्रेम ये कभी असह दुःख, कभी हलाहल " निगलते हैं जो, यही सोच, मन दूर न जाये यादों से वो बना रहे, तेरा यादमहल " ।2। -0_0- हिमांशु राय ' स्वव्यस्त' -0_0-
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